आरा, जुलाई 8 -- पीरो, संवाद सूत्र। पीरो के परमानंद नगर में चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने मंगलवार को भाग्य और अभाग्य का मतलब समझाया। स्वामी जी ने कहा जिस समय प्राणी का जन्म होता है, उसी समय उसके जीवन में घटने वाली सभी घटनाओं को लिख दिया जाता है। उस व्यक्ति के जीवन में कब दुख होगा। कब सुख होगा। प्रतिष्ठा, मान, सम्मान, समाज से तिरस्कार, दु:ख, तकलीफ, बीमारी आदि की पूरी कहानी लिख दी जाती है। हालांकि कर्म ऐसा माध्यम है, जिससे दुर्भाग्य को भी भाग्य में बदला जा सकता है। दु:ख को सुख में बदला जा सकता है। बड़ी दुर्घटना को छोटी घटना में परिवर्तित किया जा सकता है, लेकिन यह सब कुछ तब संभव होता है, जब मानव जीवन में हम अपने शरीर से कर्म द्वारा बेहतर कार्य करते हैं। भाग्य भी उसी का साथ देता है, जो...
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