रामगढ़, फरवरी 12 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि छावनी फुटबॉल मैदान में ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के 13 वें दिन गुरुवार को पूज्य स्वामी युगल शरण ने कर्म मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल कर्म-धर्म के पालन से परम लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है। मुण्डकोपनिषद् के श्लोक "परीक्ष्य लोकान्कर्मचितान्ब्राह्मणो निर्वेदमायान्नास्त्यकृतः कृतेन" का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक मनीषियों ने अनुभव किया है कि कर्म से अधिकतम स्वर्ग की प्राप्ति होती है, ब्रह्म की नहीं। स्वामी जी ने कहा कि यज्ञादि कर्म रूपी पुल को "अदृढ़" बताया गया है-"प्लवा ह्येते अदृढा यज्ञरूपा"-अर्थात कर्मकांड के सहारे माया से मुक्ति संभव नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निषिद्ध कर्म जैसे झूठ, अत्याचार, भ्रष्टाचार और चोरी का...