नई दिल्ली, दिसम्बर 16 -- आज के समय में जब सफलता को बैंक बैलेंस और लग्जरी लाइफस्टाइल से मापा जाने लगा है, तब यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि जीवन में वास्तव में कितना पैसा काफी है। लेखिका और समाजसेवी सुधा मूर्ति उन शख्सियतों में से हैं जिन्होंने अपार संपत्ति के बावजूद सादा और अर्थपूर्ण जीवन को चुना। उनका मानना है कि पैसा अपने आप में ना तो अच्छा है और ना ही बुरा, बल्कि यह केवल एक साधन है। समस्या तब शुरू होती है जब पैसा जीवन का लक्ष्य बन जाता है। सुधा मूर्ति के अनुसार, जीवन में उतना पैसा पर्याप्त है जिससे इंसान अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सके, आत्मसम्मान के साथ जी सके और भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस ना करे। वह कहती हैं कि अगर इंसान के पास रहने को घर, खाने को भोजन, पहनने को कपड़े, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा है तो वही वास्तविक समृद्धि...