गोरखपुर, जून 7 -- गोरखपुर। मुख्य संवाददाता जलवायु परिवर्तन, मानसून की अनिश्चितता और श्रमिकों की कमी जैसे मौजूदा संकटों के बीच धान की सीधी बुआई विधि (डायरेक्ट सीडिंग आफ राइश-डीएसआर) एक किफायती, प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है। संयुक्त कृषि निदेशक डॉ अरविंद कुमार सिंह मण्डल के किसानों से इस तकनीक को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। धान की पारंपरिक रोपाई विधि यानी रोपाई अब जलवायु परिवर्तन, घटती जल उपलब्धता और बढ़ती मजदूरी लागत के कारण किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गई है। इन चुनौतियों के समाधान के रूप में वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने धान की सीधी बुआई विधि को कारगर, सस्ती और संसाधन-संरक्षण तकनीक के रूप में सुझा रहे हैं। डीएसआर विधि में धान की नर्सरी, पौध उखाड़ने और रोपाई जैसी श्रमसाध्य प्रक्रियाओं की आवश्यकता नही...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.