कुशीनगर, दिसम्बर 23 -- कुशीनगर। मरीजों की जिंदगी बिचौलियों के हाथ का खिलौना हो गई है। प्राइवेट बिचौलियों की कौन कहे, स्वास्थ्य महकमे के कुछ नुमाइंदों की संलिप्तता भी कम नहीं है। यहां तक कि आशा कार्यकर्ताओं पर भी मरीजों को झांसे में लेकर निजी अस्पतालों में ले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। फिर एक प्रसूता को निजी अस्पताल में ले जाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जहां ऑपरेशन के बाद उस प्रसूता की मौत हो गई। रुपये भी खर्च कराए और जान भी नहीं बची। सुरक्षित प्रसव और जच्चा-बच्चा की सलामती के लिए गर्भधारण के बाद से लेकर बच्चे के जन्म तक सरकार रुपये खर्च कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगा रखी हैं, जो नियमित टीकाकरण से लेकर सुरक्षित प्रसव तक देखरेख करें। इसके लिए आशाओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद कई आशा ऐसी हैं, जो कमीशन के ...