दिल्ली, सितम्बर 1 -- डिजिटल स्ट्रीमिंग और मल्टीप्लेक्स के आने से बहुत पहले, दिल्ली के सिंगल-स्क्रीन सिनेमा हॉल असल में शहर के लोगों की जिंदगी का हिस्सा थे। ये जगहें शोर-शराबे वाली, थोड़ी अव्यवस्थित लेकिन हमेशा यादगार हुआ करती थीं। यहां टिकट के लिए लंबी कतारें लगती थीं, हवा में पॉपकॉर्न और समोसे की महक घुली रहती थी। अंधेरे में बैठे अजनबी एक-दूसरे के साथ मिल जाते थे, हीरो के लिए सीटियां बजाते थे और विलेन को देख कर चिल्लाते थे। किसी फिल्म को एक बार देखना काफी नहीं होता था; ये हॉल सिर्फ फिल्में दिखाने की जगह नहीं थे, बल्कि लोगों की उम्मीदों और सपनों को 35 मिमी की रील पर देखने का जरिया थे। दिल्ली की गुम होती इमारतों की लंबी लिस्ट में अब दो और सिंगल-स्क्रीन थिएटर, शकूरपुर का सम्राट सिनेमा और नारायणा सिनेमा हॉल भी शामिल हो गए हैं। इन दोनों को तो...
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