नई दिल्ली, जून 10 -- कबीर जयंती 11 जून को है। कबीर अनूठे हैं। उनके द्वारा प्रत्येक के लिए आशा का द्वार खुलता है। क्योंकि कबीर से ज्यादा साधारण आदमी खोजना कठिन है। और, अगर कबीर पहुंच सकते हैं, तो सभी पहुंच सकते हैं। कबीर निपट गंवार हैं, इसलिए गंवार के लिए भी आशा है; बे-पढ़े-लिखे हैं, इसलिए पढ़े-लिखे होने से सत्य का कोई भी संबंध नहीं है। जात-पात का कुछ ठिकाना नहीं कबीर की- शायद मुसलमान के घर पैदा हुए, हिंदू के घर बड़े हुए। इसलिए जात-पात से परमात्मा का कुछ लेना-देना नहीं है। यह भी पढ़ें- आप पर कैसे बरसेगी कृपाबिना छोड़े सब कुछ पा लिया कबीर जीवन भर गृहस्थ रहे- जुलाहे। बुनते रहे कपड़े और बेचते रहे; घर छोड़ हिमालय नहीं गए। इसलिए घर पर भी परमात्मा आ सकता है, हिमालय जाना आवश्यक नहीं। कबीर ने कुछ भी नहीं छोड़ा और सभी कुछ पा लिया। इसलिए छोड़ना पाने की शर्...