सिद्धार्थ, फरवरी 19 -- बांसी। खेसरहा क्षेत्र के कोटिया पाण्डेय गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीविष्णु महायज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को कथावाचक पंडित श्रीराम द्विवेदी ने गोकर्ण एवं धुंधकारी की कथा सुनाई। कथा सुन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथावाचक ने बताया कि तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी धुंधुली झगड़ालु स्वभाव की थी। संतान न होने से आत्मदेव सदैव चिंतित रहता था। एक दिन वह आत्महत्या का निश्चय कर कुएं के पास पहुंचा तभी वहां एक ऋषि प्रकट हुए और उसकी व्यथा सुनकर उसे एक फल देते हुए कहा कि इसे अपनी पत्नी को खिला देना, इससे पुत्र की प्राप्ति होगी। आत्मदेव ने घर आकर वह फल पत्नी को दे दिया, लेकिन पत्नी ने गर्भावस्था के कष्ट और बंधनों से बचने के लिए फल नहीं खाया। कुछ दिनों बाद उसकी बहन घर आई तो धुंधुली ने उससे सार...