मुजफ्फर नगर, नवम्बर 13 -- सनातन धर्म सभा भवन निकट झांसी की रानी पर आयोजित कथा में दूसरे दिन कथावाचक 108 गुरू जी प्रमोद सुधाकर महाराज ने प्रमुख प्रसंग राजा परीक्षित, शुकदेवजी महाराज के जन्म, परीक्षित को मिले श्राप, भागवत कथा का महत्व और भगवान के अवतारों का वर्णन किया। भक्तगण इन लीलाओं के श्रोताओं के रूप में भाव-विभोर हुए। कथावाचक परम पूज्य श्री 108 गुरू जी प्रमोद सुधाकर जी महाराज ने कहा कि राजा परीक्षित ने ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि ऋषिपुत्र ने उन्हें सात दिनों में तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का श्राप दे दिया। इसके पश्चात परीक्षित ने अपना राज्य पुत्र के हवाले करके गंगा तट पर जा कर श्रीमद्भागवत कथा को सुनने का निश्चय किया। परीक्षित को मुक्ति देने के लिए शुकदेव जी का प्राकट्य होता है। कथा व्यास ने कहा कि कथा सुनना स...
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