रिषिकेष, जनवरी 2 -- कज्ञा मर्मज्ञ आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि कलियुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग भक्ति है। नाम-स्मरण, सत्संग और कथा-श्रवण के माध्यम से ही जीव भवसागर से पार हो सकता है। शुक्रवार को गुमानीवाला कैनाल रोड गली नंबर छह में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल ने शुकदेव और राजा परीक्षित के संवाद की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने राजा परीक्षित के प्रश्नों के उत्तर में शुकदेव द्वारा बताए गए प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथा श्रवण से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम भाव जागृत होता है। उन्होंने भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि कलियुग में पितरों की शांति और सद्गति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन अत्यंत आवश्यक है। मौ...