उरई, फरवरी 4 -- जालौन। सिकरीराजा में अमर सिंह भदौरिया के आवास पर श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर व्यास गगन द्विवेदी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। भागवताचार्य गगन द्विवेदी ने कहा सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता सांसारिक स्वार्थ से परे थी। सुदामा निर्धन होने के बावजूद मित्र श्रीकृष्ण से कुछ मांगने नहीं गए, बल्कि मन में केवल प्रेम और श्रद्धा थी। बताया जब सुदामा पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने राजसी सम्मान दिया। सुदामा का जीवन सिखाता है कि सच्ची मित्रता धन, वैभव और पद से नहीं बल्कि निःस्वार्थ भाव और विश्वास से होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से कुछ मांगे बिना ही उनकी गरीबी को दूर कर दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। सुदामा चरित के प्रसंग सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं और पूरे पंडाल में जय श्रीकृष्ण...