मुजफ्फरपुर, जनवरी 16 -- गायघाट,एक संवाददाता। जारंग स्थित बुढ़िया माई स्थान पर शुक्रवार को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक मनीष पाराशर जी महाराज ने श्री शुकदेव जी महाराज के दिव्य उपदेशों का प्रसंग सुनाया। कथावाचक ने कहा कि महाराज परीक्षित ने मृत्यु के समीप पहुंच चुके व्यक्ति के कर्तव्य के विषय में प्रश्न किया। इस पर श्री शुकदेव जी महाराज ने कहा कि मरनेवाले व्यक्ति को विशेष रूप से तीन कार्य अवश्य करने चाहिए। भगवान की कथा का श्रवण, कीर्तन और स्मरण। इन्हीं के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि श्रवण, कीर्तन और स्मरण तभी संभव है जब मनुष्य अपने आसन, संग और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करे। कथा में सती चरित्र और ध्रुव चरित्र का सजीव वर्णन किया गया। ध्रुव महाराज के प्रसंग के माध्यम से बताया गया कि उन्होंने भगवान श्री...