मेरठ, मार्च 5 -- मेरठ। बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर में वार्षिकोत्सव और होली के उपलक्ष्य में चल रही भागवत कथा के दौरान भक्ति ज्ञान यज्ञ में मंगलवार को चौथे दिन कथाव्यास पंडित ब्रह्म रात हरिदोष एकलव्य ने सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भारत का चरित्र और भगवान नाम की महिमा का वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार दक्ष ने मद में चूर होकर भगवान शिव को नीचा दिखाने के लिए यज्ञ का आयोजन किया जिसके परिणाम स्वरूप उसको बकरे का मुख लगा। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि कथा अनुष्ठान और यज्ञ आत्म कल्याण के लिए होते हैं, ना की दिखावे के लिए। ध्रुव की कथा सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार ध्रुव को मात्र पांच वर्ष की आयु में ही भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन हो गए थे। यह शक्ति मात्र भगवान की भक्ति में ही है। कथा के दौरान अध्यक्ष सतीश सिंघल, सुनील गोयल, धीरेंद्र ...
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