बाराबंकी, फरवरी 9 -- सैदनपुर। दृढ़ निश्चय, निश्छल भक्ति और अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। भक्त के आगे भगवान को भी झुकना पड़ता है। ध्रुव ने कठोर तप करके भगवान विष्णु को पृथ्वी पर आने को मजबूर करके परम पद को प्राप्त किया। यह बात ग्राम कटका में राजकिशोर विश्वकर्मा द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र प्रसंग पर चर्चा करते हुए कथा व्यास पंडित बब्लू अवस्थी ने कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार ध्रुव चरित्र अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प की एक पावन कथा है। 5 वर्षीय ध्रुव ने सौतेली माँ सुरुचि के दुर्व्यवहार से आहत होकर, नारद जी के निर्देश पर भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें अचल 'ध्रुव तारा' बनने का वरदान दिया। नारद उन्हें मूल मंत्र देते हुए कहा कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप कर...
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