लखनऊ, मार्च 1 -- - टेंडर प्रक्रिया की वैधता के लिए कम से कम तीन कंपनियों द्वारा टेंडर डालना होता है अनिवार्य लखनऊ, विशेष संवाददाता पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए टेंडर डॉक्युमेंट तैयार करवाने के लिए रखे जाने वाले ट्रांजेक्शन एडवाइजर के चयन में फिर पेच फंसता दिख रहा है। शनिवार को कंसलटेंट चुने जाने के लिए बिड मंगाई गई थीं, जिनमें केवल दो ही कंपनियों ने हिस्सा लिया। अब या तो यह बिड निरस्त कर फिर से बिड मंगानी होगी या फिर बिड डालने का समय बढ़ाना होगा। कम से कम तीन कंपनियों के टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने के बाद ही इसे वैध करार दिया जाता। सूत्रों के मुताबिक, कंसल्टेंट के लिए सात कंपनियां हिस्सा लेने को तैयार थीं। शनिवार को दोपहर तीन बजे तक कंसलटेंट कंपनियों द्वारा टेंडर डाले जाने थे। टेंडर तीन मार्च को खोले जा...
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