नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- भारत के दो दिग्गज निवेशकों शंकर शर्मा और दीपक शेनॉय की हालिया टिप्पणियों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भारत वास्तव में वैश्विक व्यापार की दुनिया में वह स्थान पा सका है, जिसकी उससे अपेक्षा की जाती है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद यह चर्चा और तीखी हो गई है। शंकर शर्मा का मानना है कि भारतीय कंपनियां विदेश में कोई ठोस पहचान नहीं बना सकी हैं। उनका तर्क है कि हमारी कंपनियां संरक्षित माहौल में तो मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा करने का साहस नहीं है। उधर, कैपिटलमाइंड के सीईओ दीपक शेनॉय का कहना है कि भारत कभी भी चीन का विकल्प नहीं रहा। 'चीन+1' की जो अवधारणा वर्षों से पेश की जाती रही है, वह एक भ्रम मात्र थी। जाहिर है, इस पूरे घटनाक्...
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