लखनऊ, जुलाई 16 -- ओडिशा में बिजली के निजीकरण का प्रयोग एक बार फिर असफल रहने का हवाला देते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह निजीकरण की प्रक्रिया फौरन रद्द करने का आदेश दें। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे के मुताबिक, ओडिशा में उपभोक्ता सेवाओं में कोताही पर स्वत: संज्ञान लेते हुए वहां के नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को नोटिस जारी कर मंगलवार (15 जुलाई) को जवाब देने के लिए बुलाया था। शैलेंद्र दुबे ने कहा कि, ओडिशा देश का पहला राज्य है, जहां पर पूरी बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में है। वहां पर टाटा पावर की चार बिजली कंपनियां वितरण का काम देख रही हैं। मंगलवार को चारों कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आयोग को कोई संत...
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