रुडकी, फरवरी 23 -- एक समय था जब होली से पहले घर-घर में महिलाएं गाय के गोबर से बड़कुले बनाती थीं और वैदिक परंपराओं के साथ त्योहार मनाया जाता था। फाल्गुन मास में अमावस्या के बाद से इनकी तैयारी शुरू हो जाती थी। लेकिन बदलते दौर में यह परंपरा अब ग्रामीण अंचलों तक सिमटती जा रही है। शहरों में लोग होलिका दहन की परंपरा निभाने के लिए अब बड़कुले ऑनलाइन मंगवा रहे हैं। व्यस्त जीवनशैली और झंझट से बचने की प्रवृत्ति के कारण लोग इन्हें बनाने और सुखाने की बजाय तैयार खरीदना अधिक सुविधाजनक समझ रहे हैं। बड़ी कॉलोनियों में जहां पशु तक नहीं रखे जाते, वहां बाहर से गोबर के बड़कुले मंगवाकर होलिका दहन किया जा रहा है।
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