गया, अगस्त 28 -- ऑनलाइन पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष नहीं मिलेगा। गया जी धरती पर शारीरिक रूप से उपस्थित होकर पिंडदान करने का महत्व है। तीर्थ पुरोहित यानी गयापाल से आज्ञा लेकर शुरुआत और सुफल के साथ गयाश्राद्ध करना है। फल्गु में तर्पण और विष्णुचरण स्पर्श कर ही पिंडदान का विधान है। ऑनलाइन पिंडदान से गयापाल के साथ हजारों लोगों के व्यवसाय प्रभावित होगा। यह कहना है कि गयापाल व श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्ठल का। विष्णुपद मंदिर में गुरुवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अध्यक्ष ने कहा कि ऑनलाइन पिंडदान सनातन धर्म पर आघात है। धर्म के साथ खिलवाड़ है। धार्मिक पवित्रता को नष्ट करने का प्रयास है। गया जी आकर ही पिंडदान का महत्व है। भगवान श्री राम, युद्धिष्ठिर भी यहां आकर पिंडदान किए हैं। वायु पुराण, गया महात्मय, गरुड़ पुराण विष...
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