नई दिल्ली, सितम्बर 27 -- हमारे कर्म ही हमारी जिंदगी के सार हैं। अपने कर्मों के अनुसार ही हमारी जिंदगी का अध्याय लिखे जाते हैं। वहीं कुछ लोगों को लगता है कि बुरे कर्म करने के बाद मंदिर में मत्था टेक लेने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यही लोगों की सबसे बड़ी भूल है। अब वृंदानन के महान संत प्रेमानंद महाराज ने भी इस पर चर्चा की है। अपने हाल ही के प्रवचन में प्रेमानंद महाराज ने इस बारे में अपनी राय सामने रखी है। उनका कहना है कि जो लोग छल-कपट में उलझे होते हैं, उनकी भक्ति कभी स्वीकार नहीं होती है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों की भक्ति बेकार चली जाती है।बर्बाद होती है ऐसे लोगों की भक्ति प्रेमानंद महाराज के अनुसार इंसान में लोलुक्ता वृत्ति नहीं होनी चाहिए। लोलुक्ता वृत्ति का मतलब होता है जिन लोगों में चोरी, छल-कपट, लालच और हिंसा जैसी चीजें होती हैं। ...
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