नई दिल्ली, नवम्बर 30 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 16 वर्ष पुराने एक लापरवाही से हुई मौत के मामले में आरोपी विवेक पांडे को पर्याप्त साक्ष्य न होने के आधार पर बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनमोल नोहरिया की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष न तो विश्वसनीय गवाह पेश कर पाया और न ही घटना से जुड़े कोई ठोस तकनीकी या फोरेंसिक साक्ष्य अदालत के सामने रख सका। अदालत ने फैसले में कहा कि मामले की सबसे अहम गवाह मंजू के संबंध में ही गंभीर त्रुटि सामने आई। दावा किया गया था कि मंजू को दुर्घटना में चोट आई और जीटीबी अस्पताल में उसका एमएलसी तैयार हुआ, लेकिन रिकॉर्ड में एमएलसी मीना नाम से दर्ज था। अदालत ने कहा कि यह विसंगति अभियोजन की पूरी कहानी को संदेहास्पद बनाती है। इस बात का न तो कोई स्पष्टीकरण दिया गया कि मीना कौन है और न...
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