प्रयागराज, जनवरी 11 -- एमएनएनआईटी के यांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने संगम तट पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व और नई शिक्षा नीति (एनईपी) में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्यबोध, नैतिकता और समन्वित शिक्षा का प्रभावी मार्गदर्शक है, जिसकी प्रासंगिकता आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में कारीगरी ही यांत्रिकी अभियंत्रण का मूल आधार थी। यंत्रों के माध्यम से निर्माण, नवाचार और व्यापार का विकास हुआ, जिससे समाज की आर्थिक संरचना सुदृढ़ बनी। आध्यात्म विश्वविद्यालय में इतिहास, संस्कृत, भूगोल, कला, ब्रज संस्कृति, वाणिज्य और अभियांत्रिकी जैसे विषयों को एक साथ जोड़कर शिक्...