बागेश्वर, फरवरी 20 -- बागेश्वर। वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (एफटीआई) हल्द्वानी के 37 वन आरक्षी मंडलसेरा, बागेश्वर पहुंचे। बलवंत सिंह शाही, आईएफएस के निर्देशन में उन्होंने देवकी लघु वाटिका का अवलोकन किया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने जैव विविधता संरक्षण, पुनर्जीवित जल स्रोतों तथा मूंगा रेशम की खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की। वन आरक्षियों को वाटिका में सिलिंग, च्युरा, जामुन, बिच्छू घास (सिसौना), मेहल, घिंगारू, नाशपाती, पय्या चेरी, बांस, रिंगाल, चंदन, रुद्राक्ष सहित विभिन्न प्रजातियों की जानकारी दी गई। किशन सिंह मलड़ा ने कहा कि चीड़ की खेती उसके स्वभाव के अनुरूप दक्षिणी एवं उत्तरी ढालों पर मिश्रित वनों के विकास के साथ की जानी चाहिए।

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