नई दिल्ली, मई 3 -- आज अगर कोई ये कहे कि पाकिस्तान की पहचान अब सिर्फ उसके फटे हाल स्थिति से नहीं, बल्कि उसके जहरीले इरादों से भी है, तो गलत नहीं होगा। एक तरफ भारत है, जिसने दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर बाजारों में जगह बनाई, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान है, जिसे अब दुनिया आतंक की फैक्ट्री कहती है। आजादी के वक्त दोनों देश करीब-करीब एक जैसे हालात में थे, टूटे-फूटे ढांचे, खाली खजाना और विदेशी मदद की आस थी मगर भारत ने अपनी प्राथमिकता तय की। भारत ने शिक्षा, तकनीक, उद्योग और लोकतंत्र पर फोकस किया। 1991 के आर्थिक संकट ने देश को झकझोर दिया, मगर वहीं से सुधारों का रास्ता भी खुला। आज भारत के पास 688 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा है, जबकि पाकिस्तान महज़ 15 अरब पर सिसक रहा है।पाकिस्तान ने चुना आतंक का रास्ता पाकिस्तान ने जो रास्ता चुना, वह विकास...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.