कानपुर, जनवरी 8 -- रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के कहिंजरी में वर्ष 1914 में स्थापित श्री कृष्ण संस्कृत विद्यालय की पहचान अब मिटती जा रही है। यहां से शिक्षा ग्रहण कर तमाम विद्वान बाहर प्रदेशों में परचम लहरा रहे हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में सैकड़ों साल पुराने इस विद्यालय में बच्चों व शिक्षकों के बैठने तक की जगह नहीं बची है। इससे यहां नीम के पेड़ की छांव में पढ़ाई होती है। अब 25 लाख की धनराशि स्वीकृत होने से बदहाली दूर होने की उम्मीद बन रही है। कहिंजरी में श्री कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1914 में सेठ रामनारायण वैश्य ने कराई थी। विद्यालय का संचालन शुरू होने के बाद स्थानीय बच्चों के अलावा बाहरी जिलों से भारी संख्या में लोग आचार्य, शास्त्रीय की पढ़ाई करने आते थे। बाहरी बच्चों को खाना बनाने के लिए सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती थी।सेठ ने ...
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