बुलंदशहर, जून 22 -- राजघाट गंगा तट पर चल रही श्रीमदभागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास से दण्डी स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यदि एक क्षण भी पवित्र हृदय से सत्संग कर लिया तो भी कल्याण हो जायेगा। भगवान श्रीकृष्ण के गमन का प्रसंग में श्रोता भावविह्वल हो उठे। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 125 वर्ष भूमण्डल पर रहे। उन्होंने 24 गुरू बनाये और उनसे शिक्षा ली। परन्त आज परम्परा उल्टी हो गयी है। जीवन में किसी की निन्दा अथवा प्रसंशा नहीं करनी चाहिए। कथा की अध्यक्षता स्वामी प्रबोधश्रम महाराज ने की। कथा के बाद यजमान ब्रह्मचारी सर्वेश्वर स्वरूप और ज्ञानेश्वर स्वरूप ने आचार्य दिवाकर वशिष्ठ के आचार्यत्व में यज्ञशाला में श्रीमद्भागवत तथा शतचंडी पाठ का दशांस होम की पूर्णाहुति देकर सम्पन्न कराया। इस मौके पर ब्रह्मचारी जनार्दनस्वरूप शुक्रताल, ब्रह्मचारी स्वदे...
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