मुजफ्फरपुर, फरवरी 20 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सूबे में हर साल महिलाओं को साक्षर करने पर एक अरब से अधिक खर्च हो रहा है। दूसरी ओर इसके लिए खुले साक्षरता केंद्रों पर ताले पड़े हैं। दरअसल, इन केंद्रों के लिए तैनात शिक्षणसेवी सुबह से चार बजे तक स्कूलों में रहते हैं। दूसरी ओर, साक्षरता केंद्र को अपराह्न 2 से 5 बजे तक चलाना है। ऐसे में ये केंद्र भगवान भरोसे हैं। शिक्षण सेवियों को मानदेय, केंद्र पर शिक्षण सामग्री और केआरपी को निगरानी की राशि मिलती है। इसमें वेतन पर सूबे में 70 करोड़ से अधिक, शिक्षण सामग्री पर प्रति जिला 50 से 90 लाख तक का सालाना खर्च होता है। इसके अलावा, साक्षरता केंद्रों की मॉनिटरिंग करने को लेकर केआरपी नियुक्त हैं। हर जिले में इनकी संख्या 9 से 15 तक है। इन्हें प्रतिदिन 500 रुपये मिलते हैं। शिक्षणसेवी 9 से 4 बजे तक स्कूल ...