नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- किंशुक पाठक,एसोसिएट प्रोफेसर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी एआई ने आधुनिक युग की आधारभूत वैज्ञानिक क्रांति को एक नई प्रगति दी है। यह न केवल व्यवसाय, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा व दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि मानवीय अवधारणाओं व सामाजिक संरचना को भी नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। व्यावसायिक रूप से एआई का वैश्विक बाजार मूल्य साल 2024-25 तक लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है, और इसकी सार्वभौमिकता, अर्थात हर देश और क्षेत्र में इसकी स्वीकार्यता दिखाई दे रही है। फिर भी, एआई की वैश्विक स्वीकृति को गंभीर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। एआई की सार्वभौमिकता का सबसे बड़ा विरोध उसके अंतर्निहित पूर्वाग्रहों को लेकर दिख रहा है। दरअसल, एआई सिस्टम पूरी तरह से डाटा पर आधारित व प्रशिक्षित होते हैं...