भागलपुर, फरवरी 3 -- भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज के दौर की जरूरत है, लेकिन इसका उपयोग समाज के फायदे के लिए रचनात्मक तरीके से होना चाहिए। एआई को इंसानी बुद्धिमत्ता की मदद के लिए डिजाइन किया गया है, न कि उसे बदलने के लिए। यह बातें सोमवार को मारवाड़ी कॉलेज में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में मुख्य वक्ता और टीएमबीयू के पीजी भौतिकी विभाग के डॉ. कमल प्रसाद ने कही। एआईसीटीई की एमआईसी गतिविधि के तहत आयोजित इस सेमिनार का विषय आत्मनिर्भर भारत के लिए एआई: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की ओर एचईआई प्री-समिट जुड़ाव था। डॉ. प्रसाद ने छात्रों को बिग डेटा एनालिटिक्स, पायथन, न्यूरल नेटवर्क मॉडल और मशीन लर्निंग जैसे उभरते क्षेत्रों की जानकारी दी। उन्होंने मिथकों को तोड़ते हुए कहा कि एआई नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने उदाहर...