वाराणसी, अप्रैल 10 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सनातन संस्कृति विश्व मानव के कल्याण की सदा पक्षधर रही है। ऋषियों-मुनियों ने जितने भी विधान रचे सभी वैज्ञानिक कसौटियों पर खरे हैं। यह कहना है संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र का। वह बुधवार को केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से आयोजित नवसंवत्सर समारोह में मुख्य अतिथि थे। महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ में हुए आयोजन में प्रो. मिश्र ने कहा कि सनातनी काल गणना विश्व की श्रेष्ठतम पद्धति है। जब विश्व के लोग गिनती नहीं जानते थे तब भी भारत में सेकेंड के हजारवें हिस्से तक की गणना पद्धति प्रचलित थी। विशिष्ट अतिथि राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि हाल के दशकों में काल गणना पद्धति में विभेद के कारण हमारे प्रमुख तीज-त्योहार दो दिनों में विभक्त हो जा रहे हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव हो रहा...
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