हापुड़, फरवरी 11 -- बुधवार को नगर के आर्य समाज मंदिर में ऋषि बोधोत्सव के तहत वैदिक यज्ञ के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक संपन्न किया गया। यज्ञ ब्रह्मा धर्माचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री के सानिध्य में वैदिक अग्निहोत्र कराया गया। यज्ञमान के रूप में चमन सिंह शिशोदिया, सुनील शर्मा तथा विवेक गर्ग उपस्थित रहे। अंतरराष्ट्रीय प्रखर वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य सुख में आसक्त रहता है। दुख में नहीं,मृत्यु को बड़ा दुख माना जाता है। परंतु शरीर प्रतिक्षण परिवर्तनशील है,और प्रत्येक क्षण पुराना होकर नष्ट हो रहा है। उन्होंने आत्मचिंतन का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य के लिए यह जानना आवश्यक है कि मैं कौन हूँ और यह शरीर क्या है। प्रश्न करने की प्रवृत्ति ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है। उन्होंने जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति और तुरीय अवस्था का उल्लेख करते...