रुडकी, सितम्बर 18 -- ऊर्जा निगम में उपभोक्ताओं के बिलों की रीडिंग लेने के लिए कंपनियों को टेंडर तो हो गए हैं, लेकिन अब कंपनियों के सामने मीटर रीडर का संकट खड़ा हो गया है। जो मीटर रीडर पहले बिलों की रीडिंग ले रहे थे, वह अब अपना मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं के बिजली के बिल बनने में फिर से देरी होने की आशंका है। ऊर्जा निगम में विगत एक सितंबर से मीटर रीडिंग लेने वाली कंपनी का अनुबंध समाप्त हो गया था। इससे उपभोक्ताओं के बिल बनने में दिक्कतें आने लगी थी। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर उन्होंने तुरंत रुड़की की सभी डिवीजन के टेंडर अलग-अलग कंपनियों को दे दिए। आधिकारिक तौर पर इन कंपनियों ने रीडिंग लेने का काम तो शुरू कर दिया, लेकिन इन्हें पर्याप्त संख्या में मीटर रीडर नहीं मिल पा रहे हैं।
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