मुजफ्फरपुर, जनवरी 6 -- मुजफ्फरपुर। कैनवास पर उम्मीदें उकेरते, तूलिका से सपनों में रंग भरते, मगर खुद की जिंदगी बेरंग। यह हाल है जिले के चित्रकारों का। परख के अभाव में कला और पहचान बिना कलाकार गुमनामी में हैं। सम्मान के अवसर, बाजार और सरकार के स्तर पर आर्थिक समर्थन नहीं मिल पाने के कारण कई ने अपने शौक को ही मार लिया तो कुछ दूसरों के यहां काम करते हुए कला साधना की लौ जलाए हुए हैं। जिले के चित्रकारों ने प्रतिभा के पलायन पर भी चिंता जतायी। कहा कि जब तक इस कला को जीविका से जोड़ने के सार्थक प्रयास नहीं होंगे, तब तक चित्रकार पलायन करते रहेंगे। प्रदर्शनी के लिए 40-50 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। शहर में आर्ट गैलरी की जरूरत को नजरअंदाज किए जाने पर चित्रकारों में गहरी नाराजगी है। इनका कहना है कि अगर आर्ट गैलरी नहीं बनी तो हम विरोध प्रदर्शन करने को...
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