हापुड़, फरवरी 14 -- आर्य समाज मंदिर में आयोजित ऋषि बोधोत्सव के अंतर्गत सायंकालीन सत्र में आचार्य योगेश भारद्वाज ने अपने गहन आध्यात्मिक उद्बोधन से उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को राग-द्वेष से ऊपर उठना होगा तथा मोह में आवश्यकता से अधिक नहीं उलझना चाहिए। जब मन विषयों की ओर भागता है, उसे नियंत्रित कर भीतर की ओर मोड़ने का अभ्यास ही प्रत्याहार है। मन को साध लेना ही साधना का मूल है। आचार्य ने स्पष्ट किया कि उपासना से प्राप्त होने वाला आनंद संसार के समस्त भोगों से कहीं अधिक और स्थायी होता है। उन्होंने कहा कि बाह्य सुख क्षणिक हैं, जबकि उपासना से मिलने वाला सुख असीम और आत्मिक होता है। अपने उद्बोधन के पश्चात उन्होंने एक संक्षिप्त साधना-अभ्यास के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को प्रत्याहार की अनुभूति भी कराई...