वाराणसी, जनवरी 5 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। जैव-सक्रिय दुग्ध घटक पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान एवं निवारक स्वास्थ्य देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सुदृढ़ वैज्ञानिक आधार, नियामक अनुपालन एवं बाज़ार-उन्मुख सोच से कार्यात्मक दुग्ध खाद्य को सफल व्यावसायिक प्रस्ताव में बदला जा सकता है। ये बातें बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहीं। वह सोमवार को बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे। 'कार्यात्मक दुग्ध खाद्य: संकल्पना से व्यवसायीकरण तक' विषयक कार्यशाला में उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को तकनीकी, नियामक एवं व्यवसायीकरण से संबंधित जरूरी ज्ञान देगी। अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि वि...