साहिबगंज, दिसम्बर 11 -- साहिबगंज। उधवा पक्षी आश्रयणी में 10 साल बाद दुर्लभ पक्षी पलाश गल लौटा है। इस प्रजाति की पक्षी अंतिम बार झील में 2015 में देखी गई थी। करीब एक दशक बाद इसकी वापसी उधवा झील की जैव-विविधता के लिए अत्यंत सकारात्मक संकेत है। दरअसल, पलाश गल पक्षी एक बड़ी प्रवासी समुद्री गल प्रजाति है। इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम ग्रेट ब्लैक-हेडेड गल है। सर्दियों में दक्षिण रूस व मंगोलिया से भारत (जैसे जैसलमेर) आती है। इसकी पहचान इसके काले सिर (प्रजनन काल में) और प्रभावशाली आकार से होती है। प्रजनन दक्षिणी रूस से मंगोलिया तक दलदल व द्वीप पर करता है। सर्दी में मुख्य रूप से ये पक्षी भारत के जैसलमेर जैसे इलाकों में प्रवास करने आता है। इसका आहार मछली, अकशेरुकी, अंडे, जैविक कचरा (अवसरवादी) है। यह पक्षी दलदली जमीन पर घोंसला बनती है। 2 से 4 अंडे देती ...