हल्द्वानी, अक्टूबर 18 -- हल्द्वानी। उत्तराखंड में साइबर अपराध जिस तेजी से बढ़े हैं उसी रफ्तार से इनके तरीके भी बढ़ रहे हैं। बीते पांच साल में साइबर अपराध के तरीके दोगुने हो गए हैं। एआई का दौर आने के बाद साइबर हमलों को रोकना और अधिक मुश्किल हो गया है। पुलिस ने जागरूकता से रोकथाम की बात कही है। सीओ साइबर सुमित पांडे बताते हैं कि 2020 तक सामान्यत: ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग ईमेल और मैलवेयर वायरस जैसे साइबर ठगी के माध्यम थे। तब पीड़ितों को नकली वेबसाइट, झूठे संदेश और संक्रमित ईमेल के जरिये फंसाया जाता था। अब तकनीक बदल चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फिशिंग, क्रिप्टो-जैकिंग, डीपफेक और स्मार्टफोन मैलवेयर जैसे जटिल तरीके आम हो गए हैं। अपराधी अब वॉयस और वीडियो डीपफेक से भरोसा जीतकर नकली अनुरोध भी कर लेते हैं। उपयोगकर्ता का असानी से डे...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.