नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- उत्तराखंड सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट को सूचित किया कि राज्य में अब डॉक्टरों की कमी नहीं है क्योंकि नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है और अधिकांश रिक्त पद पहले ही भर दिए गए हैं। ऐसी स्थिति में, डॉक्टरों की संविदा सेवा विस्तार का कोई औचित्य नहीं है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ एमबीबीएस डॉक्टरों के सेवा अनुबंध विस्तार से संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने कहा कि उन्होंने उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रियायती शुल्क पर अपनी एमबीबीएस की शिक्षा पूरी की थी। इसके लिए उन्होंने तीन साल तक राज्य सरकार की सेवा करने के लिए एक बॉण्ड पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने बॉण्ड अवधि पूरी कर ली है, लेकिन वे राज्य में सेवा जारी रखने के इच्छुक ...
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