पूरन भिलंगवाल, अगस्त 28 -- चमोली जिले के जुवाग्वाड़ गांव के 34 परिवार के करीब 125 ग्रामीण चार साल से तेज बहाव वाली धौली नदी को रस्सों से लटकी ट्रॉली पर जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं। सात फरवरी 2021 को ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा और धौली नदी में आई बाढ़ ने गांव का एकमात्र पैदल झूला पुल बहा दिया था। तब से लोक निर्माण विभाग की अस्थायी ट्रॉली ही एकमात्र सहारा है। लोनिवि ने ट्रॉली के लिए जेनरेटर और तीन कर्मचारी तैनात किए हैं, पर यह सुविधा सुबह 8 से शाम 5 बजे तक ही है। इसके बाद ग्रामीणों को खुद रस्सियां खींचकर ट्रॉली चलानी पड़ती है। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में एक ही दिन पांच सड़क हादसे, नौ लोगों की मौत; पूरा परिवार भी खत्म प्रदेश में किसी वीआईपी को कोई दिक्कत हो जाए तो शासन-प्रशासन पूरी ताकत झोंककर तुरंत निदान करता है। लेकिन जुवाग्वाड़ के सौ से...
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