राजू वर्मा, फरवरी 16 -- उत्तराखंड के पौड़ी जिले में सात वन पंचायतों ने सामुदायिक सहभागिता की मिसाल पेश की। इससे न केवल पर्यावरण की सूरत बदली, बल्कि पलायन और सूखे की मार झेल रहे गांव-जंगलों की जान लौट आई। ग्रामीणों और वन प्रभाग रामनगर के संयुक्त प्रयासों से विकसित 10 हेक्टेयर का घना जंगल पारिस्थितिक संरक्षण का उत्कृष्ट मॉडल बन गया है। रामनगर के नैनीडांडा रेंज के अंतर्गत सात वन पंचायतों जोगीड़ा पल्ला, जोगीड़ा वला, केलधार, टेटगांव, मोक्षण, गुनिया मोक्षण और उनियाल मोक्षण के ग्रामीणों ने सहभागिता से वन संरक्षण और संसाधन प्रबंधन का कार्य किया है। डीएफओ मनीष जोशी ने बताया कि वर्षों पहले इन पंचायतों में अत्यधिक दबाव और सीमित वनस्पति के कारण वन क्षेत्र का क्षरण हो रहा था। इस समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2011-2012 में 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बा...