उन्नाव, फरवरी 5 -- उन्नाव। कागजी आकड़ों पर अव्वल राजस्व महकमा हकीकत में फरियादियों के लिए छलावा बन गया है। वादों के निस्तारण व तमाम सही कार्यों को समय से निपटाने के दावे कर भले ही महकमे के अफसर राजस्व परिषद के आकड़ों में खुद को टॉप की सूची देखकर खुश हो लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल इतर ही है। यहां न तो सालों से लंबित वादों के निपटारे में कोई रुचि दिखी है और न ही अंश निर्धारण के बाद ई-परवाना जारी करने जैसे सही कामों को तय समय पर निपटाने में दिलचस्पी ली गई है। फिर भी परिषद की फेयरिस्त में टॉप पर बैठे विभाग पर सवाल खड़े हो रहे है। जिले में छह तहसीलें है। यहां पर पिछले करीब दो साल से अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जो अभी तक अधिकांश तहसीलों में पूरी नहीं हो सकी है। वहीं जिन किसानों व जमीन मालिकों का अंश लग चुका है। उनके ई-परवाने के जारी...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.