रांची, सितम्बर 19 -- रांची। संतमत सत्संग आश्रम, चुटिया में ध्यान साधना शिविर में शुक्रवार को स्वामी डॉ निर्मलानंद ने मनुष्य शरीर की उपयोगिता पर बात की। उन्होंने कहा कि मानव शरीर पाने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं, क्योंकि इसी तन से प्रभु परमेश्वर की भक्ति की जा सकती है। कहा कि ईश्वर भक्ति से मानव को मुक्ति मिल सकती है। स्वामी जी ने कहा कि मानव शरीर में सभी देवता, सभी तीर्थ और सभी विद्याएं विद्यमान हैं। इसे सांसारिक भोग-विलास में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि प्रभु-भजन में लगाना चाहिए। मानव को माता-पिता, गुरुजनों, समाज और देश की सेवा करनी चाहिए और दीन-हीन व्यक्तियों की सहायता करनी चाहिए।
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