देवघर, फरवरी 12 -- मधुपुर,प्रतिनिधि। स्थानीय पंचमंदिर प्रांगण में चल रही श्रीराम कथा में कथा वाचक मधुसूदन शास्त्री ने मिथिला नगरी का वर्णन करते हुए कहा कि जहां माता सीता का अवतार हुआ, जहां महाराजा जनक जैसा प्रजा का सेवक हो, वह नगरी तो रमणीक और दर्शनीय होगी ही। जब प्रभु श्रीराम अपने भाई और गुरुजी के साथ पधारे तो यह पावन धाम हो गयी। कथावाचक ने एक से बढ़कर एक भजन और लोक गीत प्रस्तुत कर लोगों को रोमांचित कर दिया। कथावाचक ने श्रोताओं को आगाह किया कि आज के समय में अपने बच्चों को संस्कार देना बहुत आवश्यक है। बाल्य काल में दी गई शिक्षा अमिट होती है और यह आजीवन याद रहती है। ईश्वर भरोसा हैं, बल हैं, आश हैं, विश्वास हैं। इसलिए संत जन कहते हैं कि अपने जीवन की नैया इनके सहारे छोड़ दीजिए, आपका जीवन सफल हो जाएगा, आप भव से पार उतर जाइएगा। इस अवसर पर श्री...
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