रांची, जनवरी 10 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी अपने सेवाकाल में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना को स्वीकार कर लेता है और उसके अंतर्गत सभी टर्मिनल लाभ प्राप्त कर लेता है, तो वह बाद में राज्य सरकार की पेंशन योजना का दावा नहीं कर सकता। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने इस आधार पर एकल पीठ के पेंशन भुगतान के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि ईपीएफ का लाभ लेना यह दर्शाता है कि कर्मचारी ने स्वेच्छा से उस वैधानिक व्यवस्था को चुना है। ऐसे में राज्य पेंशन का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। एकलपीठ में सावित्री देवी ने याचिका दायर कर कहा गया था कि उनके दिवंगत पति जॉय कुमार महतो की नियुक्ति वर्ष 1967 में बिहार सरकार के खाद्य आपूर्ति एवं वाणिज्य ...
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