आजमगढ़, फरवरी 13 -- आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। मुबारकपुर कस्बे में 30 अप्रैल 1999 को पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की पोखरे में सिरकटी लाश मिलने के बाद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसा भड़क गई। रुक-रुककर करीब 19 महीने तक मुबारकपुर सुलगता रहा। तीन बार हुए बवाल के दौरान दोनों तरफ से 17 लोगों की जानें चली गईं। दर्जनों लोग घायल हो गए। दोनों समुदायों के बीच विवाद की शुरुआत 1999 में मोहर्रम के दिन हुई थी। मुबारकपुर कस्बे में मोहर्रम की नौवीं की रात जुलूस निकाला जा रहा था। कस्बे के पुरासोफी टुन्न स्थित शिया समुदाय के इमामबाड़ा के बगल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्दा लगाया गया था। दसवीं के दिन सुबह किसी ने पर्दे में आग लगा दी। सुबह 11 बजे शिया समुदाय की तरफ से जुलूस निकाला जाना था। पर्दा जलाने की बात थोड़ी देर में ही कस्बे में फैल गई। जिसके बाद शि...