कानपुर, फरवरी 23 -- कानपुर। शहर काजी मुफ्ती (डॉ.) यूनुस रजा ओवैसी ने रमजान हेल्पलाइन में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इबादत करने यानी नमाज या तरावीह में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का किसी भी शक्ल में इस्तेमाल शरीयत में सही नहीं है। नमाज के दौरान इमाम का सामने मौजूद रहना जरूरी है। रमजान हेल्पलाइन में कर्नलगंज के एक शख्स राशिद खान ने पूछा था कि एआई से कुरआन की तिलावत सुनकर तरावीह (रमजान की विशेष नमाज) पढ़ने पर क्या तरावीह पूरी हो जाएगी। मुफ्ती ओवैसी ने कहा कि किराअत में इमाम की वास्तविक मौजूदगी जरूरी है। उसे नमाज अदा करानी होगी। एआई से रिकॉर्ड आवाज से तरावीह या उसके पीछे नमाज अदा करना सही नहीं है। नदीम अहमद के एक सवाल के जवाब में मुफ्ती ने कहा कि डिजिटल वॉलेट की रकम का एक साल पूरा हो गया है तो उस पर जकात देनी होगी। रकम बैंक में हो या म...