अलीगढ़, फरवरी 19 -- खैर, संवाददाता। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ एवं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहास, स्मृति और राजनीति के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. शशिभूषण मिश्रा ने कहा कि एक इतिहासकार को सुनी-सुनाई बातों से अधिक प्रत्यक्ष तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए। इतिहास लेखन चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा कार्य है। उन्होंने कहा कि परंपरा अपनी पहचान स्मृतियों के माध्यम से बनाती है, किंतु इतिहास की शक्ति अक्सर राजनीति को असहज करती है। डॉ. रामाशंकर सिंह ने कहा कि उपेक्षित समुदाय अपनी गौरवशाली परंपरा से जुड़ने के लिए नए आख्यान गढ़ते हैं। चर्चित कवि एवं आलोचक प्रो. बद्रीनारायण ने कहा कि शोधार्थियों का दायित्व है कि वे बिखरी हुई स्मृतियों और आख्यानों को एकत्र कर नई ...