लखीसराय, फरवरी 28 -- चानन, निज संवाददाता। इटौन कृत्रिम पशु गर्भाधान केन्द्र में कर्मी व डॉक्टर की कमी से हमेशा ताला लटका रहता है। जिस कारण किसानों को अपने पशुओं को गर्भाधान कराने के लिए निजी चिकित्सक के पास जाना पड़ता है। बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं रहने से यहां के किसानों को अच्छे नस्ल की पशु पालन में दिक्कत हो रही है। जागरूकता के अभाव में पशु बांझपन के शिकार हो रहे है। जिसे देखने की फुर्सत हुक्मरानों के पास नहीं है। समय पर नहीं हो पाता इलाज पशु चिकित्सक नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र में पशुओं का इलाज सही समय पर नहीं हो पाता है। जिस कारण कई पशुओं की मौत हो जाती है। यहां के किसान बड़े पैमाने पर गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी समेत अन्य पालतू जानवर पालते है। पिछले साल हुए टीकाकरण के मुताबिक 29 हजार से ज्यादा पशु मौजूद है। जिसमें 60 फीसदी पशु दुधारू है...
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