इटावा औरैया, फरवरी 22 -- हैवरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग के साथ श्रद्धापूर्वक समापन हो गया। अंतिम दिवस पर सुबह से ही कथा पंडाल में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा और महाआरती व पूर्णाहुति के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ। कथा व्यास आचार्य स्वामी प्रणवपुरी जी महाराज, पीठाधीश्वर महामृत्युंजय मठ, उज्जैन ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक, दार्शनिक और शास्त्रीय विवेचन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सुदामा प्रसंग केवल मित्रता का आख्यान नहीं, बल्कि भक्ति की शुद्धतम अभिव्यक्ति है। सुदामा की निर्धनता बाह्य थी, किंतु उनका अंतःकरण वैराग्य, संतोष और विश्वास से परिपूर्ण था। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रव्य नहीं, भाव को स्वीकार किया यह संदेश आज भी मानव जीवन को दिशा देता है। उन्होंने आगे कहा कि भागवत का मू...