इटावा औरैया, दिसम्बर 15 -- इटावा महोत्सव में आध्यात्मिक सत्संग से सजा गीता जयंती कार्यक्रम सोमवार को प्रदर्शनी कैम्प में आयोजित किया गया। सफला एकादशी के उपलक्ष में आयोजित गीता महोत्सव में पूर्व प्राचार्य डॉ. विद्याकान्त तिवारी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन जीने की कला है और जिस प्रकार शैशव, किशोरावस्था, युवावस्था और बुढ़ापा जैसे परिवर्तन आते रहते हैं। उसी प्रकार शरीर का त्याग कर आत्मा नया शरीर धारण करता है यही प्रक्रिया तब जीवन मुक्ति का साधन बन जाता है जब प्राणी अनासक्त कर्मयोगी बनकर जीवन जीता है। उन्होने महाभारत के भीष्म पर्व का उल्लेख करते हुये व्यास जी द्वारा संजय को दिव्य दृष्टि दिये जाने का जिक्र किया और कहा कि महाभारत में जो कुछ हो रहा था वह सब कुछ धृतराष्ट्र को संजय बता रहे थे। गीता महोत्सव में माधव गीता के प्रणेता गोविन्द माधव श...